श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 30: अलर्कके ध्यानयोगका उदाहरण देकर पितामहोंका परशुरामजीको समझाना और परशुरामजीका तपस्याके द्वारा सिद्धि प्राप्त करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  14.30.9 
अलर्क उवाच
आघ्राय सुबहून् गन्धांस्तानेव प्रतिगृध्यति।
तस्माद् घ्राणं प्रति शरान् प्रतिमोक्ष्याम्यहं शितान्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
अलर्क बोला - मेरी यह नासिका अनेक प्रकार की सुगंधियों का अनुभव करके भी उन्हीं की इच्छा करती है, इसलिए मैं इस नासिका पर ही ये तीखे बाण चलाऊँगा॥9॥
 
Alarka said - This nose of mine, after experiencing many kinds of fragrances, still desires the same ones, therefore I will shoot these sharp arrows at this nostril only.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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