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mahabharat 14.30.4: महामते! बड़े-बड़े कार्यों का आरम्भ छोड़कर वह एक वृक्ष के नीचे बैठकर सूक्ष्म तत्त्वों की खोज करने के लिए इस प्रकार सोचने लगा॥4॥   |   mahabharat अध्याय 14.30: अलर्कके ध्यानयोगका उदाहरण देकर पितामहोंका परशुरामजीको समझाना और परशुरामजीका तपस्याके द्वारा सिद्धि प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.30.4 
स्थितस्य वृक्षमूलेषु तस्य चिन्ता बभूव ह।
उत्सृज्य सुमह त् कर्म सूक्ष्मं प्रति महामते॥ ४॥
 
 
अनुवाद
महामते! बड़े-बड़े कार्यों का आरम्भ छोड़कर वह एक वृक्ष के नीचे बैठकर सूक्ष्म तत्त्वों की खोज करने के लिए इस प्रकार सोचने लगा॥4॥
 
Mahamate! Leaving aside the beginning of big deeds, he sat under a tree and started thinking like this to discover the subtle elements. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)