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श्लोक 14.30.3  |
ससागरान्तां धनुषा विनिर्जित्य महीमिमाम्।
कृत्वा सुदुष्करं कर्म मन: सूक्ष्मे समादधे॥ ३॥ |
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| अनुवाद |
| उन्होंने अपने धनुष की सहायता से पृथ्वी पर्यन्त समुद्र पर्यन्त विजय प्राप्त करके अत्यन्त कठिन पराक्रम किया था। इसके पश्चात् उनका मन सूक्ष्म तत्त्वों की खोज में लग गया। ॥3॥ |
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| With the help of his bow, he had performed a very difficult feat by conquering the earth up to the sea. After this, his mind got engaged in the search of the subtle elements. ॥3॥ |
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