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श्लोक 14.30.18  |
अलर्क उवाच
श्रुत्वा तु विविधान् शब्दांस्तानेव प्रतिगृध्यति।
तस्माच्छ्रोत्रं प्रति शरान् प्रतिमुञ्चाम्यहं शितान्॥ १८॥ |
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| अनुवाद |
| अलर्क बोला - यह कान बार-बार नाना प्रकार की ध्वनियाँ सुनता है और उन्हीं की इच्छा करता है, इसलिए मैं इस श्रवणेन्द्रिय पर तीक्ष्ण बाण चलाऊँगा। |
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| Alarka said - This ear repeatedly hears various kinds of sounds and desires the same. Therefore I will shoot these sharp arrows at the sense of hearing. |
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