श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 29: परशुरामजीके द्वारा क्षत्रिय-कुलका संहार  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  14.29.19 
राम राम निवर्तस्व कं गुणं तात पश्यसि।
क्षत्रबन्धूनिमान् प्राणैर्विप्रयोज्य पुन: पुन:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
‘पुत्र! परशुराम! यह वध-कर्म बंद करो। परशुराम! इन बेचारे क्षत्रियों के बार-बार प्राण लेने में तुम्हें क्या लाभ दिखाई देता है?’॥19॥
 
‘Son! Parshuram! Stop this act of killing. Parshuram! What benefit do you see in taking the lives of these poor Kshatriyas again and again?’॥19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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