vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 28: ज्ञानी पुरुषकी स्थिति तथा अध्वर्यु और यतिका संवाद*
»
श्लोक 7
श्लोक
14.28.7
प्रोक्ष्यमाणं पशुं दृष्ट्वा यज्ञकर्मण्यथाब्रवीत्।
यतिरध्वर्युमासीनो हिंसेयमिति कुत्सयन्॥ ७॥
अनुवाद
यज्ञ में पशु का वध होते देख, बैठे हुए यत्न ने उसकी निन्दा की और अध्वर्यु से कहा - 'यह हिंसा है (अतः यह पाप होगा)'॥7॥
Seeing an animal being slaughtered in a yagya, a sitting Yatna condemned it and said to Adhvaryu - 'This is violence (hence it will be a sin)'. 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×