श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 28: ज्ञानी पुरुषकी स्थिति तथा अध्वर्यु और यतिका संवाद*  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  14.28.7 
प्रोक्ष्यमाणं पशुं दृष्ट्वा यज्ञकर्मण्यथाब्रवीत्।
यतिरध्वर्युमासीनो हिंसेयमिति कुत्सयन्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
यज्ञ में पशु का वध होते देख, बैठे हुए यत्न ने उसकी निन्दा की और अध्वर्यु से कहा - 'यह हिंसा है (अतः यह पाप होगा)'॥7॥
 
Seeing an animal being slaughtered in a yagya, a sitting Yatna condemned it and said to Adhvaryu - 'This is violence (hence it will be a sin)'. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)