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mahabharat 14.27.7: सात विशाल वृक्ष हैं, उन वृक्षों के सात फल हैं और उन फलों का भोग करने वाले सात अतिथि हैं। सात आश्रम हैं। सात प्रकार की समाधियाँ और सात प्रकार की दीक्षाएँ हैं। यही उस वन का स्वरूप है ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 14.27: अध्यात्मविषयक महान् वनका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 27: अध्यात्मविषयक महान् वनका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  14.27.7 
तस्मिन् वने सप्त महाद्रुमाश्च
फलानि सप्तातिथयश्च सप्त।
सप्ताश्रमा: सप्त समाधयश्च
दीक्षाश्च सप्तैतदरण्यरूपम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
सात विशाल वृक्ष हैं, उन वृक्षों के सात फल हैं और उन फलों का भोग करने वाले सात अतिथि हैं। सात आश्रम हैं। सात प्रकार की समाधियाँ और सात प्रकार की दीक्षाएँ हैं। यही उस वन का स्वरूप है ॥7॥
 
There are seven big trees, seven fruits of those trees and seven guests who enjoy those fruits. There are seven ashramas. There are seven types of samadhi and seven types of initiations. This is the nature of that forest. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)