श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 26: अन्तर्यामीकी प्रधानता  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  14.26.18 
एतदेवेदृशं सूक्ष्मं ब्रह्मचर्यं विदुर्बुधा:।
विदित्वा चान्वपद्यन्त क्षेत्रज्ञेनानुदर्शिता:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
विद्वानों ने इसे सूक्ष्म ब्रह्मचर्य कहा है। तत्त्वदर्शी के उपदेश से प्रबुद्ध पुरुष इस ब्रह्मचर्य के स्वरूप को जानते हैं और सदैव इसका पालन करते हैं॥18॥
 
Scholars have called this as subtle celibacy. Enlightened by the teachings of the Tattvadarshi, the enlightened souls know the nature of this celibacy and always follow it.॥ 18॥
 
इति श्रीमहाभारते आश्वमेधिके पर्वणि अनुगीतापर्वणि ब्राह्मणगीतासु षड्‍‍विंशोऽध्याय:॥ २६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्वमेधिकपर्वके अन्तर्गत अनुगीतापर्वमें ब्राह्मणगीताविषयक छब्बीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २६॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)