Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.26.17: ब्रह्म ही उसका ईंधन है, ब्रह्म ही उसकी अग्नि है, वह ब्रह्म से उत्पन्न है, ब्रह्म ही उसका जल है और ब्रह्म ही उसका गुरु है। उसके विचार सदैव ब्रह्म में ही लीन रहते हैं ॥17॥ | mahabharat अध्याय 14.26: अन्तर्यामीकी प्रधानता । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्मैव समिधस्तस्य ब्रह्माग्निर्ब्रह्मसम्भव:।
आपो ब्रह्म गुरुर्ब्रह्म स ब्रह्मणि समाहित:॥ १७॥
अनुवाद
ब्रह्म ही उसका ईंधन है, ब्रह्म ही उसकी अग्नि है, वह ब्रह्म से उत्पन्न है, ब्रह्म ही उसका जल है और ब्रह्म ही उसका गुरु है। उसके विचार सदैव ब्रह्म में ही लीन रहते हैं ॥17॥
Brahma is his fuel, Brahma is his fire, he is born from Brahma, Brahma is his water and Brahma is his Guru. His thoughts are always absorbed in Brahma. ॥17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥