Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.26.13: पहले वह कर्म का अनुमोदन करता है, फिर जीव की उस कर्म की ओर प्रवृत्ति होती है। इस प्रकार हृदय में प्रकट होने वाला भगवान ही गुरु, ज्ञानी, श्रोता और द्वेषी है। 13॥ | mahabharat अध्याय 14.26: अन्तर्यामीकी प्रधानता । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्य चानुमते कर्म तत: पश्चात् प्रवर्तते।
गुरुर्बोद्धा च श्रोता च द्वेष्टा च हृदि नि:सृत:॥ १३॥
अनुवाद
पहले वह कर्म का अनुमोदन करता है, फिर जीव की उस कर्म की ओर प्रवृत्ति होती है। इस प्रकार हृदय में प्रकट होने वाला भगवान ही गुरु, ज्ञानी, श्रोता और द्वेषी है। 13॥
First he approves the action, then the living being has a tendency towards that action. In this way, God who appears in the heart is the Guru, the knowledgeable one, the listener and the hater. 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥