श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 24: देवर्षि नारद और देवमतका संवाद एवं उदानके उत्कृष्ट रूपका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  14.24.9 
प्राणापानाविदं द्वन्द्वमवाक् चोर्ध्वं च गच्छत:।
व्यान: समानश्चैवोभौ तिर्यग् द्वन्द्वत्वमुच्यते॥ ९॥
 
 
अनुवाद
प्राण और अपान-ये दोनों भी द्वैत हैं। ये नीचे और ऊपर की ओर जाते हैं। व्यान और समान-ये दोनों मध्यवर्ती द्वैत कहलाते हैं॥9॥
 
Prana and Apana-these two are also dualities. They go downwards and upwards. Vyana and Samana-these two are called intermediate dualities.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)