श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 24: देवर्षि नारद और देवमतका संवाद एवं उदानके उत्कृष्ट रूपका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  14.24.5 
नारद उवाच
संकल्पाज्जायते हर्ष: शब्दादपि च जायते।
रसात् संजायते चापि रूपादपि च जायते॥ ५॥
 
 
अनुवाद
नारदजी बोले - 'मुनि! सुख संकल्प से, प्रिय वचनों से, रस से और रूप से भी उत्पन्न होता है।' ॥5॥
 
Narada said, 'Muni! Happiness is generated by resolution, by agreeable words, by taste and also by form.' ॥5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)