श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 24: देवर्षि नारद और देवमतका संवाद एवं उदानके उत्कृष्ट रूपका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  14.24.2 
देवमत उवाच
जन्तो: संजायमानस्य किं नु पूर्वं प्रवर्तते।
प्राणोऽपान: समानो वा व्यानो वोदान एव च॥ २॥
 
 
अनुवाद
देवमत ने पूछा - हे देवमुनि! जब कोई जीव जन्म लेता है, तो उसके शरीर में सबसे पहले कौन सी प्रवृत्ति उत्पन्न होती है? प्राण, अपान, समान, व्यान या उदान?॥2॥
 
Devamat asked - O sage of gods! When a living being is born, which tendency arises first in its body? Prana, Apana, Samana, Vyana or Udana?॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)