श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 24: देवर्षि नारद और देवमतका संवाद एवं उदानके उत्कृष्ट रूपका वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  14.24.15 
सच्चासच्चैव तद् द्वन्द्वं तयोर्मध्ये हुताशन:।
एतद् रूपमुदानस्य परमं ब्राह्मणा विदु:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
सत्य और असत्य - दोनों द्वैत हैं और उनके मध्य में अग्नि है। ब्राह्मण इसे उदान का सर्वोत्तम रूप मानते हैं ॥15॥
 
Truth and untruth – both are dualities and there is fire in their middle. Brahmins consider this to be the most excellent form of Udaan. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)