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mahabharat 14.24.10: अग्नि अर्थात् ईश्वर ही पूर्ण देवता है। यह वेद उसी ईश्वर का आदेश है। उसी वेद से ब्राह्मण में बुद्धिमतापूर्ण ज्ञान उत्पन्न होता है। 10॥   |   mahabharat अध्याय 14.24: देवर्षि नारद और देवमतका संवाद एवं उदानके उत्कृष्ट रूपका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 24: देवर्षि नारद और देवमतका संवाद एवं उदानके उत्कृष्ट रूपका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  14.24.10 
अग्निर्वै देवता: सर्वा इति देवस्य शासनम्।
संजायते ब्राह्मणस्य ज्ञानं बुद्धिसमन्वितम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
अग्नि अर्थात् ईश्वर ही पूर्ण देवता है। यह वेद उसी ईश्वर का आदेश है। उसी वेद से ब्राह्मण में बुद्धिमतापूर्ण ज्ञान उत्पन्न होता है। 10॥
 
Agni i.e. God is the complete deity. This Veda is the order of that God. It is from that Veda that intelligent knowledge arises in a Brahmin. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)