Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.23.7: ब्रह्माजी बोले - तुम सब प्राणियों के शरीरों में जो भी स्थित हो, उनमें से जिसकी मृत्यु से सारा जीवन लीन हो जाता है और जिसकी गति से सारा जीवन गतिमान हो जाता है, वही श्रेष्ठ है। अब तुम जहाँ चाहो वहाँ जाओ। | mahabharat अध्याय 14.23: प्राण, अपान आदिका संवाद और ब्रह्माजीका सबकी श्रेष्ठता बतलाना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्मोवाच
यस्मिन् प्रलीने प्रलयं व्रजन्ति
सर्वे प्राणा: प्राणभृतां शरीरे।
यस्मिन् प्रचीर्णे च पुनश्चरन्ति
स वै श्रेष्ठो गच्छत यत्र काम:॥ ७॥
अनुवाद
ब्रह्माजी बोले - तुम सब प्राणियों के शरीरों में जो भी स्थित हो, उनमें से जिसकी मृत्यु से सारा जीवन लीन हो जाता है और जिसकी गति से सारा जीवन गतिमान हो जाता है, वही श्रेष्ठ है। अब तुम जहाँ चाहो वहाँ जाओ।
Brahmaji said - Out of all of you who are present in the bodies of living beings, the one whose death causes all the life to be absorbed and whose movement causes all the life to move is the best. Now go wherever you wish.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥