Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.23.19: ‘जब मैं विलीन होता हूँ, तब प्राणियों के शरीरों की समस्त प्राणशक्तियाँ विलीन हो जाती हैं और जब मैं गति करता हूँ, तब वे सब गति करने लगते हैं। इसलिए मैं सर्वश्रेष्ठ हूँ। देखो, अब मैं विलीन हो रहा हूँ (तब तुम भी विलीन हो जाओगे)’॥19॥ | mahabharat अध्याय 14.23: प्राण, अपान आदिका संवाद और ब्रह्माजीका सबकी श्रेष्ठता बतलाना । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘जब मैं विलीन होता हूँ, तब प्राणियों के शरीरों की समस्त प्राणशक्तियाँ विलीन हो जाती हैं और जब मैं गति करता हूँ, तब वे सब गति करने लगते हैं। इसलिए मैं सर्वश्रेष्ठ हूँ। देखो, अब मैं विलीन हो रहा हूँ (तब तुम भी विलीन हो जाओगे)’॥19॥
‘When I dissolve, all the life forces in the bodies of living beings dissolve and when I move, all of them start moving. That is why I am the best. Look, now I am dissolving (then you will also dissolve)’॥19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥