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mahabharat 14.23.10: प्राण! तुम इस शरीर में वैसे नहीं हो जैसे हम इसमें हैं। इसलिए तुम हमसे श्रेष्ठ नहीं हो। केवल अपान ही तुम्हारे वश में है [इसलिए तुम्हारे विलीन होने से हमें कोई हानि नहीं पहुँच सकती]।' तब प्राण पहले की तरह चलने लगा। इसके बाद अपान बोला।   |   mahabharat अध्याय 14.23: प्राण, अपान आदिका संवाद और ब्रह्माजीका सबकी श्रेष्ठता बतलाना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 23: प्राण, अपान आदिका संवाद और ब्रह्माजीका सबकी श्रेष्ठता बतलाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  14.23.10 
न त्वं सर्वमिदं व्याप्य तिष्ठसीह यथा वयम्।
न त्वं श्रेष्ठो हि न: प्राण अपानो हि वशे तव।
प्रचचार पुन: प्राणस्तमपानोऽभ्यभाषत॥ १०॥
 
 
अनुवाद
प्राण! तुम इस शरीर में वैसे नहीं हो जैसे हम इसमें हैं। इसलिए तुम हमसे श्रेष्ठ नहीं हो। केवल अपान ही तुम्हारे वश में है [इसलिए तुम्हारे विलीन होने से हमें कोई हानि नहीं पहुँच सकती]।' तब प्राण पहले की तरह चलने लगा। इसके बाद अपान बोला।
 
Prana! You are not present in this body like we are present in it. Therefore you are not superior to us. Only Apana is in your control [so we cannot be harmed by your dissolution].' Then Prana started moving again as before. Thereafter Apana spoke.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)