Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.21.19: हे महात्मन्! देवी सरस्वती सदैव प्राण और अपान के मध्य निवास करती हैं। जब वे प्राण की सहायता के बिना निम्नतम अवस्था को पहुँचने लगीं, तो वे दौड़कर प्रजापति के पास गईं और बोलीं, 'प्रभु! आप प्रसन्न हों।' | mahabharat अध्याय 14.21: दस होताओंसे सम्पन्न होनेवाले यज्ञका वर्णन तथा मन और वाणीकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे महात्मन्! देवी सरस्वती सदैव प्राण और अपान के मध्य निवास करती हैं। जब वे प्राण की सहायता के बिना निम्नतम अवस्था को पहुँचने लगीं, तो वे दौड़कर प्रजापति के पास गईं और बोलीं, 'प्रभु! आप प्रसन्न हों।'
O great one! Goddess Saraswati always resides between Prana and Apan. When she started reaching the lowest state without the help of Prana, she ran to Prajapati and said, 'Lord! Please be pleased.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥