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mahabharat 14.21.18: क्योंकि हे सुन्दरी सरस्वती! तुम स्वयं मेरे पास आकर अपना पक्ष पुष्ट कर चुकी हो। अतः मैं निश्चिंत होकर कुछ कहूँगा॥18॥   |   mahabharat अध्याय 14.21: दस होताओंसे सम्पन्न होनेवाले यज्ञका वर्णन तथा मन और वाणीकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 21: दस होताओंसे सम्पन्न होनेवाले यज्ञका वर्णन तथा मन और वाणीकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  14.21.18 
यस्मादपि समाधिस्ते स्वयमभ्येत्य शोभने।
तस्मादुच्छ्वासमासाद्य प्रवक्ष्यामि सरस्वति॥ १८॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि हे सुन्दरी सरस्वती! तुम स्वयं मेरे पास आकर अपना पक्ष पुष्ट कर चुकी हो। अतः मैं निश्चिंत होकर कुछ कहूँगा॥18॥
 
Because, beautiful Saraswati! You yourself have come near me and confirmed your side. So I will take a sigh of relief and say something.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)