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mahabharat 14.21.17: उस अलौकिक विषय को प्रकाशित करने वाले मन्त्र, चरित्र या वाणी का अनुसरण करने वाला मन भी गतिमान नाम धारण करता है, फिर भी मन वाणी के रूप में आपके द्वारा ही उस अतीन्द्रिय जगत में प्रवेश करता है। इसलिए आप मन से श्रेष्ठ और अधिक महिमावान हैं। 17॥   |   mahabharat अध्याय 14.21: दस होताओंसे सम्पन्न होनेवाले यज्ञका वर्णन तथा मन और वाणीकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 21: दस होताओंसे सम्पन्न होनेवाले यज्ञका वर्णन तथा मन और वाणीकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  14.21.17 
यस्तु तं विषयं गच्छेन्मन्त्रो वर्ण: स्वरोऽपि वा।
तन्मनो जङ्गमो नाम तस्मादसि गरीयसी॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उस अलौकिक विषय को प्रकाशित करने वाले मन्त्र, चरित्र या वाणी का अनुसरण करने वाला मन भी गतिमान नाम धारण करता है, फिर भी मन वाणी के रूप में आपके द्वारा ही उस अतीन्द्रिय जगत में प्रवेश करता है। इसलिए आप मन से श्रेष्ठ और अधिक महिमावान हैं। 17॥
 
The mind that follows the mantra, character or voice that illuminates that supernatural subject also bears the name of moving, yet the mind enters that extrasensory world only through you in the form of speech. That's why you are better than the mind and more glorious. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)