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mahabharat 14.20.27: रूप, स्पर्श और शब्द की उत्पत्ति वहीं से होती है। संशय भी वहीं उत्पन्न होता है और निश्चय देने वाली बुद्धि भी वहीं उत्पन्न होती है। जन्म सात प्रकार के माने गए हैं॥27॥   |   mahabharat अध्याय 14.20: ब्राह्मणगीता—एक ब्राह्मणका अपनी पत्नीसे ज्ञानयज्ञका उपदेश करना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 20: ब्राह्मणगीता—एक ब्राह्मणका अपनी पत्नीसे ज्ञानयज्ञका उपदेश करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  14.20.27 
तत: संजायते रूपं तत: स्पर्शोऽभिजायते।
तत: संजायते शब्द: संशयस्तत्र जायते।
तत: संजायते निष्ठा जन्मैतत् सप्तधा विदु:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
रूप, स्पर्श और शब्द की उत्पत्ति वहीं से होती है। संशय भी वहीं उत्पन्न होता है और निश्चय देने वाली बुद्धि भी वहीं उत्पन्न होती है। जन्म सात प्रकार के माने गए हैं॥27॥
 
‘It is from there that form, touch and sound emerge. Doubt is also born there and the intellect that gives certainty is also born there. It is considered that there are seven types of birth.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)