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mahabharat 14.20.22: सुप्रभात! जो पदार्थ सूंघने योग्य हैं, पीने योग्य हैं, दिखाई देने योग्य हैं, स्पर्श करने योग्य हैं, सुनने योग्य हैं, विचारने योग्य हैं और समझने योग्य हैं - इन सब पर सदैव दृष्टि रखनी चाहिए (उनमें भविष्य की बुद्धि रखनी चाहिए)। 22॥   |   mahabharat अध्याय 14.20: ब्राह्मणगीता—एक ब्राह्मणका अपनी पत्नीसे ज्ञानयज्ञका उपदेश करना   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.20.22 
घ्रेेये पेये च दृश्ये च स्पृश्ये श्रव्ये तथैव च।
मन्तव्येऽप्यथ बोद्धव्ये सुभगे पश्य सर्वदा॥ २२॥
 
 
अनुवाद
सुप्रभात! जो पदार्थ सूंघने योग्य हैं, पीने योग्य हैं, दिखाई देने योग्य हैं, स्पर्श करने योग्य हैं, सुनने योग्य हैं, विचारने योग्य हैं और समझने योग्य हैं - इन सब पर सदैव दृष्टि रखनी चाहिए (उनमें भविष्य की बुद्धि रखनी चाहिए)। 22॥
 
Good morning! Things that can be smelled, are drinkable, can be seen, can be touched, can be heard, are worth thinking about and can be understood - you should always keep an eye on all these (have future intelligence in them). 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)