श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 20: ब्राह्मणगीता—एक ब्राह्मणका अपनी पत्नीसे ज्ञानयज्ञका उपदेश करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  14.20.21 
घ्राता भक्षयिता द्रष्टा स्प्रष्टा श्रोता च पञ्चम:।
मन्ता बोद्धा च सप्तैते भवन्ति परमर्त्विज:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
‘जो सूँघता है, खाता है, देखता है, स्पर्श करता है, पाँचवाँ सुनता है, मनन करता है और समझता है – ये सात उत्तम ऋत्विज हैं ॥21॥
 
‘The one who smells, eats, sees, touches, fifth listens, contemplates and understands – these are the seven best Ritvijas. 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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