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तेषामन्योन्यभक्षाणां सर्वेषां देहचारिणाम्।
अग्निर्वैश्वानरो मध्ये सप्तधा दीव्यतेऽन्तरा॥ १८॥
अनुवाद
‘एक दूसरे को धारण करने वाली तथा सबके शरीर में संचार करने वाली पाँच प्राणवायुओं के मध्य में स्थित वैश्वानर अग्नि, जो नाभिमण्डल है, सात रूपों में प्रकाशमान है ॥18॥
‘The Vaishvanar Agni situated in the middle of the five vital airs that support each other and circulate in everyone's bodies, which is the Nabhimandal, is luminous in seven forms. 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥