| श्री महाभारत » पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व » अध्याय 19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन » श्लोक 63 |
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| | | | श्लोक 14.19.63  | हेतुमच्चैतदुद्दिष्टमुपायाश्चास्य साधने।
सिद्धं फलं च मोक्षश्च दु:खस्य च विनिर्णय:॥ ६३॥ | | | | | | अनुवाद | | इस प्रकार मैंने तुम्हें मोक्ष धर्म का युक्तियुक्त उपदेश दिया है, मोक्ष प्राप्ति के उपाय भी बताये हैं, तथा मोक्ष प्राप्ति का स्वरूप, फल, मोक्ष और दुःख का भी निश्चय किया है। | | | | In this way I have given you a logical teaching of the Dharma of Moksha. I have also told you the ways to attain it and have also decided the nature of its attainment, its result, Moksha and sorrow. 63. | | ✨ ai-generated | | |
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