श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  14.19.61 
इमं धर्मं समास्थाय येऽपि स्यु: पापयोनय:।
स्त्रियो वैश्यास्तथा शूद्रास्तेऽपि यान्ति परां गतिम्॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
इस आत्म-साक्षात्काररूपी धर्म का आश्रय लेकर स्त्री, वैश्य, शूद्र और पाप योनियों में उत्पन्न हुए मनुष्य भी परम मोक्ष को प्राप्त होते हैं ॥ 61॥
 
By taking shelter of this religion of self-realization, even women, Vaishyas, Shudras and people born in sinful states also attain the ultimate salvation. ॥ 61॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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