Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.19.60: पार्थ! सनातन ब्रह्म ही जीव की परम गति है। ज्ञानी पुरुष शरीर त्यागकर ब्रह्म में ही अमरत्व प्राप्त कर लेता है और सदा के लिए सुखी हो जाता है। 60॥ | mahabharat अध्याय 14.19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
परा हि सा गति: पार्थ यत् तद् ब्रह्म सनातनम्।
यत्रामृतत्वं प्राप्नोति त्यक्त्वा देहं सदा सुखी॥ ६०॥
अनुवाद
पार्थ! सनातन ब्रह्म ही जीव की परम गति है। ज्ञानी पुरुष शरीर त्यागकर ब्रह्म में ही अमरत्व प्राप्त कर लेता है और सदा के लिए सुखी हो जाता है। 60॥
Parth! The eternal Brahma is the ultimate speed of the living being. A wise man leaves his body and attains immortality in Brahma itself and becomes happy forever. 60॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥