श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  14.19.59 
क्रियावद्भिर्हि कौन्तेय देवलोक: समावृत:।
न चैतदिष्टं देवानां मर्त्यरूपनिवर्तनम्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीकुमार! स्वर्गलोक कर्मशील मनुष्यों से भरा हुआ है। देवताओं की यह इच्छा नहीं है कि मनुष्य मृत्युलोक में चले जाएँ ॥59॥
 
Kuntikumar! The heavenly world is full of active men. It is not the wish of the gods that humans should retire as mortals. 59॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)