vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन
»
श्लोक 59
श्लोक
14.19.59
क्रियावद्भिर्हि कौन्तेय देवलोक: समावृत:।
न चैतदिष्टं देवानां मर्त्यरूपनिवर्तनम्॥ ५९॥
अनुवाद
कुन्तीकुमार! स्वर्गलोक कर्मशील मनुष्यों से भरा हुआ है। देवताओं की यह इच्छा नहीं है कि मनुष्य मृत्युलोक में चले जाएँ ॥59॥
Kuntikumar! The heavenly world is full of active men. It is not the wish of the gods that humans should retire as mortals. 59॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×