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mahabharat 14.19.57: हे भरतश्रेष्ठ! मैंने तुम्हें देवताओं का यह परम गोपनीय रहस्य बताया है। हे पार्थ! इस संसार में किसी भी मनुष्य ने यह रहस्य नहीं सुना है ॥57॥   |   mahabharat अध्याय 14.19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  14.19.57 
सुरहस्यमिदं प्रोक्तं देवानां भरतर्षभ।
कच्चिन्नेदं श्रुतं पार्थ मनुष्येणेह कर्हिचित्॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! मैंने तुम्हें देवताओं का यह परम गोपनीय रहस्य बताया है। हे पार्थ! इस संसार में किसी भी मनुष्य ने यह रहस्य नहीं सुना है ॥57॥
 
O best of the Bharatas! I have told you this most secret of the gods. O Partha! No man in this world has ever heard this secret. ॥ 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)