भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं - अर्जुन! मोक्षधर्म की शरण में आये हुए वे श्रेष्ठ ब्राह्मण मुझसे यह प्रसंग कहकर वहीं अन्तर्धान हो गये॥54॥
Lord Krishna says - Arjun! That great Brahmin, who had taken refuge in the path of Mokshadharma, after narrating this episode to me, disappeared from there itself. ॥ 54॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥