Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.19.5: जो किसी की वस्तु का लोभ नहीं करता, किसी का तिरस्कार नहीं करता, जिसका मन द्वन्द्वों से ग्रस्त नहीं होता और जिसका मन आसक्ति से रहित है, वह पूर्णतया मुक्त है ॥5॥ | mahabharat अध्याय 14.19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न कस्यचित् स्पृह य ते नावजानाति किंचन।
निर्द्वन्द्वो वीतरागात्मा सर्वथा मुक्त एव स:॥ ५॥
अनुवाद
जो किसी की वस्तु का लोभ नहीं करता, किसी का तिरस्कार नहीं करता, जिसका मन द्वन्द्वों से ग्रस्त नहीं होता और जिसका मन आसक्ति से रहित है, वह पूर्णतया मुक्त है ॥5॥
He who does not covet anyone's possessions, does not disregard anyone, whose mind is not affected by conflicts and whose mind is free from attachment is completely free. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥