श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  14.19.49 
सर्वत:पाणिपादान्त: सर्वतोऽक्षिशिरोमुख:।
सर्वत:श्रुतिमाँल्लोके सर्वमावृत्य तिष्ठति॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
उसके सब ओर हाथ-पैर हैं, सब ओर नेत्र और सिर हैं, और सब ओर कान हैं; क्योंकि वह सबमें व्याप्त होकर जगत् में स्थित है ॥49॥
 
He has hands and legs on all sides, eyes and head on all sides, and ears on all sides; because he exists in the world pervading everything. ॥ 49॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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