Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.19.47: इस प्रकार ध्यान में निरन्तर प्रयत्नशील रहने वाले पुरुष का मन शीघ्र ही प्रसन्न हो जाता है और वह परब्रह्म परमात्मा को प्राप्त हो जाता है, जिसके मिल जाने से मनुष्य स्वतः ही प्रकृति और उसके विकारों को समझ लेता है ॥ 47॥ | mahabharat अध्याय 14.19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं सततमुद्युक्त: प्रीतात्मा नचिरादिव।
आसादयति तद्ब्रह्म यद्दृष्ट्वा स्यात् प्रधानवित्॥ ४७॥
अनुवाद
इस प्रकार ध्यान में निरन्तर प्रयत्नशील रहने वाले पुरुष का मन शीघ्र ही प्रसन्न हो जाता है और वह परब्रह्म परमात्मा को प्राप्त हो जाता है, जिसके मिल जाने से मनुष्य स्वतः ही प्रकृति और उसके विकारों को समझ लेता है ॥ 47॥
In this way, the mind of a person who always strives for meditation soon becomes happy and he attains the Supreme Brahman, the Supreme Soul, by meeting whom a man automatically understands nature and its disorders. ॥ 47॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥