श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  14.19.44-45h 
इति सम्परिपृष्टोऽहं तेन विप्रेण माधव॥ ४४॥
प्रत्यब्रुवं महाबाहो यथाश्रुतमरिंदम।
 
 
अनुवाद
हे महाबाहु माधव! हे शत्रुओं का नाश करने वाले! जब ब्राह्मण ने मुझसे यह पूछा, तब मैंने जो कुछ सुना था, वही उससे कह दिया। ॥44 1/2॥
 
O mighty-armed Madhava, O destroyer of enemies! When the Brahmin asked me this, I told him exactly what I had heard. ॥ 44 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)