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श्लोक 14.19.43-44h  |
जीव: कथं वहति च चेष्टमान: कलेवरम्।
किं वर्णं कीदृशं चैव निवेशयति वै पुन:॥ ४३॥
याथातथ्येन भगवन् वक्तुमर्हसि मेऽनघ। |
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| अनुवाद |
| कर्मात्मा इस शरीर का भार किस प्रकार वहन करता है? फिर वह किस प्रकार और किस रंग का शरीर धारण करता है? हे निष्पाप प्रभु! यह सब विस्तारपूर्वक मुझे बताइए।'॥43 1/2॥ |
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| How does the active soul bear the weight of this body? Then how and of what colour does it take on a body? Sinless Lord! Tell me all this in detail.'॥ 43 1/2 ॥ |
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