श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन  »  श्लोक 43-44h
 
 
श्लोक  14.19.43-44h 
जीव: कथं वहति च चेष्टमान: कलेवरम्।
किं वर्णं कीदृशं चैव निवेशयति वै पुन:॥ ४३॥
याथातथ्येन भगवन् वक्तुमर्हसि मेऽनघ।
 
 
अनुवाद
कर्मात्मा इस शरीर का भार किस प्रकार वहन करता है? फिर वह किस प्रकार और किस रंग का शरीर धारण करता है? हे निष्पाप प्रभु! यह सब विस्तारपूर्वक मुझे बताइए।'॥43 1/2॥
 
How does the active soul bear the weight of this body? Then how and of what colour does it take on a body? Sinless Lord! Tell me all this in detail.'॥ 43 1/2 ॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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