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श्री महाभारत
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पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
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अध्याय 19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन
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श्लोक 42
श्लोक
14.19.42
कुतो वायं प्रश्वसिति उच्छ्वसित्यपि वा पुन:।
कं च देशमधिष्ठाय तिष्ठत्यात्मायमात्मनि॥ ४२॥
अनुवाद
यह जीवात्मा किस प्रकार श्वास लेता है, किस प्रकार छोड़ता है, तथा इस शरीर में किस स्थान पर सदैव विद्यमान रहता है?॥ 42॥
‘How does this living entity breathe, how does it exhale, and in what place does it reside in this body while always being present?॥ 42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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