श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन  »  श्लोक 40-41
 
 
श्लोक  14.19.40-41 
तथा मांसं च मेदश्च स्नाय्वस्थीनि च योषिति।
कथमेतानि सर्वाणि शरीराणि शरीरिणाम्॥ ४०॥
वर्धते वर्धमानस्य वर्धते च कथं बलम्।
निरोधानां निर्गमनं मलानां च पृथक् पृथक्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
स्त्री के शरीर में मांस, मेद, स्नायु और अस्थियाँ कैसे बनती हैं ? ये सब देहधारी प्राणियों के शरीर कैसे बढ़ते हैं ? बढ़ते हुए शरीर का बल कैसे बढ़ता है ? जो मल सब ओर से अवरुद्ध हो जाते हैं, वे कैसे पृथक् होकर बाहर निकल जाते हैं ?॥40-41॥
 
‘How does flesh, fat, sinews and bones form in a woman's body? How do all these bodies of embodied beings grow? How does the strength of a growing body increase? How are those wastes which are obstructed from all sides expelled separately?॥ 40-41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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