vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व
»
अध्याय 19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन
»
श्लोक 4
श्लोक
14.19.4
जीवितं मरणं चोभे सुखदु:खे तथैव च।
लाभालाभे प्रियद्वेष्ये य: सम: स च मुच्यते॥ ४॥
अनुवाद
जो मनुष्य जीवन-मरण, सुख-दुःख, लाभ-हानि, राग-द्वेष आदि द्वन्द्वों को समभाव से देखता है, वह मुक्त हो जाता है ॥4॥
One who looks at the conflicts of life-death, happiness-sorrow, profit-loss, love-dislike etc. with equanimity becomes free. 4॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas