श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  14.19.38 
इत्युक्त: स मया शिष्यो मेधावी मधुसूदन।
पप्रच्छ पुनरेवेमं मोक्षधर्मं सुदुर्वचम्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! मेरे ऐसा कहने पर उस बुद्धिमान शिष्य ने मुझसे पुनः मोक्षरूपी धर्म के विषय में पूछा, जिसका वर्णन करना अत्यन्त कठिन है-॥38॥
 
Madhusudan! After I said this, that intelligent disciple once again asked me about the religion of salvation, which is very difficult to explain -॥ 38॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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