Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.19.30: वह अपने मन को आत्मा में लीन कर लेता है और उसी में लीन हो जाता है। वृद्धावस्था के दुःखों से छुटकारा पाकर वह सुखपूर्वक सोता है और शाश्वत आनंद का अनुभव करता है ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 14.19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  14.19.30 
सम्यग्युक्त्वा स आत्मानमात्मन्येव प्रतिष्ठते।
विनिवृत्तजरादु:ख: सुखं स्वपिति चापि स:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
वह अपने मन को आत्मा में लीन कर लेता है और उसी में लीन हो जाता है। वृद्धावस्था के दुःखों से छुटकारा पाकर वह सुखपूर्वक सोता है और शाश्वत आनंद का अनुभव करता है ॥30॥
 
He absorbs his mind into the Self and becomes absorbed in it. Having got rid of the sorrows of old age, he sleeps peacefully and experiences eternal bliss. ॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)