श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  14.19.29 
नैनं शस्त्राणि विध्यन्ते न मृत्युश्चास्य विद्यते।
नात: सुखतरं किंचिल्लोके क्वचन दृश्यते॥ २९॥
 
 
अनुवाद
शस्त्र उसे छेद नहीं सकते, मृत्यु उस तक नहीं पहुंच सकती, संसार में उससे अधिक सुखी कोई नहीं है।
 
Weapons cannot pierce him, death cannot reach him, no one is happier than him in the world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)