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mahabharat 14.19.26: जो योगी अपनी इन्द्रियों को वश में कर लेता है, वह देवताओं में भी देवता हो सकता है। इस अनित्य शरीर को त्यागकर वह अविनाशी ब्रह्म को प्राप्त हो जाता है। 26॥   |   mahabharat अध्याय 14.19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  14.19.26 
देवानामपि देवत्वं युक्त: कारयते वशी।
ब्रह्म चाव्ययमाप्नोति हित्वा देहमशाश्वतम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
जो योगी अपनी इन्द्रियों को वश में कर लेता है, वह देवताओं में भी देवता हो सकता है। इस अनित्य शरीर को त्यागकर वह अविनाशी ब्रह्म को प्राप्त हो जाता है। 26॥
 
A yogi who controls his senses can also be a god among gods. By abandoning this impermanent body he attains the imperishable Brahman. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)