श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  14.19.23 
मुञ्जं शरीरमित्याहुरिषीकामात्मनि श्रिताम्।
एतन्निदर्शनं प्रोक्तं योगविद्भिरनुत्तमम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
यहाँ शरीर को 'मूंज' और आत्मा को 'शिकारी' कहा गया है। योगशास्त्रियों ने शरीर और आत्मा का भेद समझाने के लिए बहुत अच्छा उदाहरण दिया है॥ 23॥
 
Here the body has been called the 'moonj' and the soul has been called the 'stalker'. The Yogic scholars have given a very good example to understand the difference between the body and the soul.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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