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mahabharat 14.19.17: इन्द्रियों को विषयों से हटाकर मन में और मन को आत्मा में स्थापित करो। इस प्रकार पहले घोर तप करना चाहिए और फिर मोक्ष प्राप्ति हेतु उपायों का आश्रय लेना चाहिए। 17॥   |   mahabharat अध्याय 14.19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  14.19.17 
इन्द्रियाणि तु संहृत्य मन आत्मनि धारयेत्।
तीव्रं तप्त्वा तप: पूर्वं मोक्षयोगं समाचरेत्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
इन्द्रियों को विषयों से हटाकर मन में और मन को आत्मा में स्थापित करो। इस प्रकार पहले घोर तप करना चाहिए और फिर मोक्ष प्राप्ति हेतु उपायों का आश्रय लेना चाहिए। 17॥
 
Remove the senses from the objects and establish them in the mind and the mind in the soul. In this way, one should first perform intense penance and then resort to measures that lead to salvation. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)