श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  14.19.15 
अत: परं प्रवक्ष्यामि योगशास्त्रमनुत्तमम्।
युञ्जन्त: सिद्धमात्मानं यथा पश्यन्ति योगिन:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अब मैं उस परम उत्तम योगशास्त्र का वर्णन करूँगा, जिसके अनुसार योगाभ्यास करने वाला योगी अपनी आत्मा को प्राप्त करता है ॥15॥
 
Now I will describe that most excellent science of Yoga, according to which the Yogi who practices Yoga, realizes his soul. ॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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