श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 19: गुरु-शिष्यके संवादमें मोक्षप्राप्तिके उपायका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  14.19.11 
पञ्चभूतगुणैर्हीनममूर्तिमदहेतुकम्।
अगुणं गुणभोक्तारं य: पश्यति स मुच्यते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जिसकी दृष्टि में आत्मा पाँचों भौतिक गुणों से निकृष्ट, निराकार, अकारण और निर्गुण है, फिर भी (माया के संसर्ग से) गुणों का भोक्ता है, वह मुक्त हो जाता है ॥11॥
 
In whose view the soul is inferior to the five material qualities, formless, causeless and without qualities, yet is the enjoyer of the qualities (due to Maya's connection), he becomes liberated. 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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