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mahabharat 14.18.7-8: वह आत्मा समस्त प्राणियों के अस्तित्व का कारण है, क्योंकि उसी के द्वारा सभी प्राणी जीवित रहते हैं। वह आत्मा गर्भ के प्रत्येक भाग में प्रवेश करके तुरंत ही उसके प्रत्येक भाग में चेतना उत्पन्न कर देती है और प्राण-स्थान - वक्षस्थल - में स्थित होकर समस्त इन्द्रियों को नियंत्रित करती है। तभी गर्भ चेतन होता है। ॥7-8॥   |   mahabharat अध्याय 14.18: जीवके गर्भ-प्रवेश,आचार-धर्म, कर्म-फलकी अनिवार्यता तथा संसारसे तरनेके उपायका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 18: जीवके गर्भ-प्रवेश,आचार-धर्म, कर्म-फलकी अनिवार्यता तथा संसारसे तरनेके उपायका वर्णन  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  14.18.7-8 
तद् बीजं सर्वभूतानां तेन जीवन्ति जन्तव:।
स जीव: सर्वगात्राणि गर्भस्याविश्य भागश:॥ ७॥
दधाति चेतसा सद्य: प्राणस्थानेष्ववस्थित:।
तत: स्पन्दयतेऽङ्गानि स गर्भश्चेतनान्वित:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वह आत्मा समस्त प्राणियों के अस्तित्व का कारण है, क्योंकि उसी के द्वारा सभी प्राणी जीवित रहते हैं। वह आत्मा गर्भ के प्रत्येक भाग में प्रवेश करके तुरंत ही उसके प्रत्येक भाग में चेतना उत्पन्न कर देती है और प्राण-स्थान - वक्षस्थल - में स्थित होकर समस्त इन्द्रियों को नियंत्रित करती है। तभी गर्भ चेतन होता है। ॥7-8॥
 
That soul is the cause of the existence of all beings, because it is through it that all beings remain alive. That soul enters every part of the womb and immediately brings consciousness to every part of it and it is situated in the place of life – the chest – that it controls all the organs. Only then does the womb become conscious. ॥ 7-8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)