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श्लोक  14.18.27 
इदं तत्क्षरमित्युक्तं परं त्वमृतमक्षरम्।
त्रयाणां मिथुनं सर्वमेकैकस्य पृथक् पृथक्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
इस प्राकृतिक जगत को क्षर कहते हैं, इसके अतिरिक्त अविनाशी आत्मा को अक्षर कहते हैं। (इनमें से शुद्ध परब्रह्म अद्वितीय है) - इन तीनों में से क्षर और अक्षर ये दो तत्व प्रत्येक जीव के लिए अलग-अलग हैं।
 
This natural world is called Kshar, apart from this the imperishable soul is called Akshar. (Out of these, pure Parabrahma is unique) - Out of these three, the two elements - Kshar and Akshar, are different for every living being.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)