श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 18: जीवके गर्भ-प्रवेश,आचार-धर्म, कर्म-फलकी अनिवार्यता तथा संसारसे तरनेके उपायका वर्णन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  14.18.25 
शरीरमात्मन: कृत्वा सर्वलोकपितामह:।
त्रैलोक्यमसृजद् ब्रह्मा कृत्स्नं स्थावरजङ्गमम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
सम्पूर्ण जगत के पितामह ब्रह्मा ने पहले स्वयं शरीर धारण करके (कर्मानुसार) स्थावर-जंगम प्राणियों के रूप में सम्पूर्ण तीनों लोकों की रचना की ॥25॥
 
Brahma, the grandfather of the entire universe, first took a body himself and created the entire three worlds (according to their karma) in the form of mobile and immobile beings. ॥25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)